Hardest Motivational Speech In Hindi – मैं कैसे रुक जाऊ

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Hardest Motivational Speech In Hindi - मैं कैसे रुक जाऊ?

Hardest Motivational Speech In Hindi – जब अंदर से आवाज आती है की यार थोड़ा सो लेते है तो मेरे पापा के Pocket के रखे चिल्लर की आवाज मुझे जगा देती है। ये ज़िंदगी क्या सिखाएगी मुझे? मेरे ज़िंदगी के पहले टीचर मेरे पापा थे और मैंने उन क्लासो को अच्छी तरह सीखा है। ये ज़िंदगी क्या डराएगी मुझे ? मैंने डर को पापा से हारते हुए देखा है। टूट-टूटकर जुड़ना मैंने पापा से सीखा है, जुड़-जुड़ कर आगे बढ़ना मैंने पापा से सीखा है।

यार पापा में एक बात तो होती है। जितने खडूस दीखते है ना उतने होते नहीं है। यार पापा में एक बात तो होती है जितने मजबूत दीखते है ना उतने ही अकेले में आँशु जरूर बहाते है। रूक जाना मेरे लिए सबसे आसान है पर रुक कैसे जाऊ मेरे पाप के पसीने की बुँदे टपक रही है। सो जाना मेरे लिए आसान है पर सो कैसे जाऊ जाने कितनी राते हो गए मेरे पापा के जगे हुए।

बचपन में जब गिर जाता था तो पापा ऊँगली पकड़कर उठाते थे और बोलते थे की साबास बेटा कुछ नहीं हुआ। आज मेरे वही पापा खुद गिरने के कगार पर है आज मेरे वही पापा इस ललकार पे है की मैं अकेला नहीं हूँ मेरा बेटा मेरे साथ है। जिसको बाप की ऊँगली पकड़ने का मौका मिलता है ना उसको ज़िंदगी में कभी और किसी सहारे की जरुरत नहीं पड़ती।

हां मेरे खून में पहले से ही है जितना, मेरे किस्मत तो मेरे पापा ने पहले ही लिख दी थी जब मुझे पेन पड़कना सिखाया था और ताजुक की बात ये है की मैं अब भी किस्मत में कमिया निकालता हूँ। जो बोलते है ना की पापा तो ऐसे ही बोलते है उनका काम है बोलना वो लोग उनसे पूछिए जिनके बाप नहीं है। अरे ये मुश्किलें क्या रोकेंगी मुझे जब मेरे पापा बुखार में भी काम पर जाने से नहीं रुके।

अरे ये दुनिया क्या डराएगी मुझे जब मेरे पापा ने इस डर को हमेशा हराया है की कल के राशन का क्या होगा, कल की मजदूरी का क्या होगा, मेरी फ़ीस का क्या होगा? मुझे तो पता ही नहीं था आज से पहले की जिस तरह से अपने पापा को अपना हौसला समझता हूँ उसी तरह से मेरे पापा का हौसला मैं हूँ क्योकि वो हर दिन इस हिम्मत से काम पर जाते है की मेरा बेटा पढ़ रहा है ना वो बड़ा हो रहा है ना और मैं देख क्या कर रहा हूँ यहाँ।

जिस भगवान जैसे बाप ने मेरी किस्मत लिखी उसी की कीमत में कांटे लिख रहा हूँ मैं.. मैं क्या कर रहा हूँ। जिस इंसान को बचपन में देखकर किसी भी पत्थर को किसी भी गड्ढे को देखकर पार कर जाता था ये सोचकर क्या डर है यार.. उस पार मेरे पापा खड़े है ना आज मैं उसी व्यक्ति को मैं अपनी आजादी के बिच में आने वाली दीवार मान रहा हूँ। अरे अगर कोई तुम्हारी सफलता से खुश होगा ना तो वो या तो तुम खुद होंगे या तुम्हारे माँ-बाप होंगे।

मैं उनका दर्द समझ सकता हूँ जिनके पापा नहीं है इसलिए फिकर मत करना दोस्त तुम वो बनना जो तुम्हारे पापा अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं बन पाए लेकिन उस जगह पर तुम्हे हमेशा देखना चाहते थे और अगर यह भी नहीं पता की वो तुम्हे क्या बनता हुआ देखन चाहते थे तो मैं बताता हूँ सिर्फ और सिर्फ मेहनत करके सफल होने वाला एक इंसान।

इसे हर उस व्यक्ति और Student के पास जरूर पहुँचाना जो तमाम मुश्किलों के बाद भी कुछ बड़ा करना चाहता है अपने माँ बाप का नाम रोशन करना चाहता है


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