पहले समझना होगा की जाना कहाँ है – Motivational Story In Hindi

पहले समझना होगा की जाना कहाँ है

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पहले समझना होगा की जाना कहाँ है - Powerful Motivational Story In Hindi

एक बार एक नौजवान लड़का रेलवे स्टेशन पर पहुंचा और स्टेशन पर पहुंचकर टिकट काउंटर पर गया और वह जाकर कहने लगा की मुझे एक टिकट दे दो काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने उससे पूंछा की आपको कहाँ का टिकट, चाहिए लड़के ने कहाँ टिकट दे दो.. आपको बात समझ नहीं आ रही हैं मुझे टिकट देदो..

काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने सोचा की ये सायद थोड़ा सा खिसका हुआ हैं इसलिए इस प्रकार की बातें कर रहा हैं काउंटर पे बैठे व्यक्ति ने फिर से पूंछा के अरे भाई साहब आपको कहाँ का टिकट चाहिए बताईये तो।

लड़के ने कहाँ अरे मैं तुमसे टिकट मांग रहा हूँ तुम्हे देना नहीं हैं क्या मुझे टिकट दे दो अब काउंटर पर बैठे व्यक्ति को थोड़ा गुस्सा आ गया और उसने उस व्यक्ति को भगा दिया और कहाँ पीछे बहुत सारे लोग खड़े हुए हैं तुम यहाँ से चले जाओ वरना मैं पुलिस को बुला लूँगा वो लड़का थोड़ा सा गुस्सा हुआ और वहाँ से चला गया और उसके बाद वो प्लेटफॉर्म पर आ गया जहाँ पर बहुत सारे लोग खड़े हुए थे और किसी ट्रैन का इंतजार कर रहे थे अब थोड़े देर के बाद ही वहाँ पर एक ट्रैन आ गयी अब सभी लोग उस ट्रैन में चढ़ने लगे वहाँ लड़का भी उस ट्रैन में चढ़ गया।

अब मैं सभी से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ जिसका जवाब आपको मुझे देना हैं आप बताएगा की वह लड़का अब कहाँ पर पहुंचेगा.. हां आप बताईये की वह लड़का अब कहाँ पहुंचेगा।

आप मुझे बताईये वह लड़का वहाँ पहुंचेगा जहाँ वाकई में उसे जाना हैं या फिर वो वहाँ पहुंचेगा जहाँ पर वो ट्रैन उसे ले जाएगी जी हां बिलकुल सही कहाँ आप ने वह लड़का वहाँ पहुंचेगा जहाँ वो ट्रैन लेकर के जाएगी।

अब आप भी अपने आप से पूछ कर देखिये की आप भी बिना लक्ष्य वाले ट्रैन में सफर तो नहीं कर रहे कई बार आप भी अपने माँ-बाप को दिखाने के चक्कर में अपने दोस्त-यार को दिखने के चक्कर में बिना लक्ष्य वाले ट्रैन में बैठ जाते हैं और उन्हें कुछ कर के दिखाना चाहते हैं क्या आपको लगता ही की ये सही हैं।

अब ट्रैन में बैठा व्यक्ति चला जा रहा है..चला जा रहा हैं.. लेकिन कुछ दिन के बाद वो बोर हो जाता हैं परेशान होने लगता हैं की ये मैं कहाँ जा रहा हूँ और फिर थोड़े दिन के बाद उसे एक स्टेशन दीखता हैं और बहुत सारे लोग उतर रहे होते हैं और फिर वो भी वहाँ पर उतर जाता हैं लेकिन स्टेशन पर उतरने के बाद उसे ये समझ में आता हैं की मुझे यहाँ आना ही नहीं था मुझे तो कहीं और जाना था।

अब फिर से आप अपने आप से पूछियेगा की कई बार आप किसी रास्ते पर निकल लेते हैं बिना लक्ष्य बनाये निकल लेते हैं और कुछ दिनों के बाद आपको यह महसूस होता हैं की आपको यह बनना ही नहीं था आपको तो यह करना ही नहीं था आप तो किसी और चीज़ के लिए परफेक्ट हैं और आपको तो वो करना था।। आप सिर्फ लोगो के दिखाने के चक्कर में किसी चीज़ को बनने की कोशिश करते हैं जब की असल में वो आप होते ही नहीं हैं।

एक बिना लक्ष्य के यात्रा करने पर आपका पूरा जीवन खराब हो सकता हैं और वहीं पर एक महत्वपूर्ण चीज़ खराब होती ही हैं जो कभी वापस नहीं आ सकती और वो हैं आपका समय और इसलिए सबसे पहले आप सही जगह का चुनाव करे की आपको जाना कहाँ हैं।

उसके बाद स्टेशन पर जाकर अपनी सही ट्रैन ढूंढे क्योकि वहाँ पर बहुत सारी ट्रेंने होंगी बहुत सारे लोग अलग-अलग ट्रैन में चढ़ रहे होंगे लेकिन आपको अपनी ट्रैन ढूढ़ना हैं जो आपको अपने सही लक्ष्य पर पहुँचाएगी।

यदि आप किसी को दिखाने के लिए कोई भी काम कर रहे हो तो आप उसे आज ही छोड़ दीजिये और अपने एक सही लक्ष्य का चुनाव कीजिये जो आपको एक सही यात्रा पर पहुँचाएगी।

कई लोग अपने जीवन में बिना लक्ष्य के घूमते रहते हैं, भटकते रहते हैं, परेशान होते रहते हैं और जीवन के अंत में कहते हैं की मैंने अपने जीवन में कुछ नहीं पाया क्या आप भी उनमे से एक बनना चाहते हैं या फिर एक सही लक्ष्य का चुनाव कर के अपने जीवन को ख़ुशी-ख़ुशी प्रसन्ता से जीना चाहते हैं फैसला आपका हैं।।

।।धनयवाद।।


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