Mobile Phone Addiction In Hindi – मोबाइल की लत छोड़ दोगे।

Mobile Phone Addiction In Hindi

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मोबाइल की लत छोड़ दोगे। Mobile Phone Addiction In Hindi

मोबाइल की लत छोड़ दोगे – 5 Hour 27 Minutes इतना टाइम एक Average इंसान दिन में मोबाइल फ़ोन पर स्पेंड करता है जब की योंग्सटर्स 5 Hour 42 Minutes स्पेंड करते है तो अगर आप एक Average इंसान हो तो Approximately आप अपने ज़िंदगी के 19710 Hours सिर्फ फ़ोन को ही दे रहे हो यानि करीबन 821 दिन।

और क्या आपको पता है की किसी भी फील्ड में Best Of Best Level में पहुंचने के लिए हमें उस स्किल को कितना टाइम देना पड़ता है। I Hope आपको ये नंबर याद होगा और ये नंबर है 10000 Hours.

यानि अगर हम Music में Best Of Best बनना चाहते है A.R Rahman जितने Level तक पहुंचना चाहते है तो हमें 10000 Hours देने पड़ेंगे, बिज़नेस में Best Of Best बनना चाहते है मुकेश अम्बानी जितना तो भी हमें 10000 Hours देने पड़ेंगे, सचिन तेंदुलकर जितना बेस्ट बनना चाहते है तो भी 10000 Hours.

चलो मान लेते है की हम 4 Hours रोज़ देते है किसी स्किल पर 7 सालो के लिए। तो क्या आप जानते है की कितने  घंटे आप स्पेंड कर चुके होंगे ये नंबर आता है 4*365*7=10220 Hours यानि हम Best Of Best वाले लेवल में पहुंच गए होंगे।

अगर हम 4 Hours 5 साल के लिए भी देते है तो हम 7300 Hours उस स्किल को दे चुके होंगे और इसमें हमारे आस-पास वाले Maximum लोगो को पता चल जायेगा की हम अपनी स्किल में Above Average है और मास्टर लेवल तक पहुंचने वाले है।

तो Obviously अब सवाल ये आता है की रोज आखिर फ़ोन में 5, 5:30 घंटे बिता ही रहे है तो उतना ही समय हम किसी स्किल्स में डाइवर्ट भी तो कर सकते है और अपनी फील्ड में Best Of Best बन सकते है।

लेकिन आपको पता है की ये करना इतना भी आसान भी नहीं है हम अपना सबसे ज्यादा समय फेसबुक, इन्सटाग्राम, टेलीग्राम, इंटरनेट ट्विटर और यूट्यूब पर स्पेंड करते है।

Tesla और Space-X के फाउंडर Elon Musk बोलते है की सोशल मीडिया से हम बहुत दुखी हो जाते है Specially Instagram. इंस्टाग्राम पर लगता है की लोग कुछ अच्छा ही लाइफ जी रहे है जितनी की वो जी भी नहीं रहे होते है।

लोग अपनी Instagram में वो पिक्चर पोस्ट करते है जिनमे वो बहुत खुश लग रहे हो या अपनी पिक्चर में इतनी Filter यूज़ कर देते है जिससे वो बहुत ब्यूटीफुल लगते है जितने वो Actual में है भी नहीं।

बहुत ही कम लोग जो अपनी पिक्टूए में फ़िल्टर यूज़ नहीं करते कम से कम ऐसी पिक्चर सेलेक्ट कर के डालते है जिसमे Lighting या Angel की वजह से वो अच्छे दिखे होते है। अब होता ये है की जब हम ये पिक्चर देखते है तो हम सोचते है की यार ये लोग तो इतने खूबसूरत है खुश है और हम ना खूबसूरत है और ना खुश है तो इसका मतलब है की मैं एक लूज़र ही हूँ।

जब की Actually जिन लोगो की हम पिक्चर देख कर दुखी हो रहे होते है वो खुद भी खुश नहीं है और कई लोग जो बहुत ही ज्यादा खुश दिख रहे थे अपनी इंस्टा पोस्ट में वही लोग रियल लाइफ में सबसे ज्यादा दुखी होते है।

अब Elon बोलते है की Happiness = Reality – Expectation और रियलिटी में तो सब वही है एक कॉमन इंसान लेकिन होता ये है की औरो के साथ खुद को Compare कर के हमारी Expectation बढ़ जाती है और इसीलिए हम और दुखी फील करने लगते है।

यानि In Short Social Media Application और उनकी Notification से Time Waist  तो हो ही रहा है लेकिन Excite भी बढ़ रही है, Deprecation भी हो रहा है, हमारा पेसेंस भी ख़त्म हो रहा है और सलियत में कोई सोशल होना ही नहीं चाहता। अगर हम किसी के साथ में बैठे भी है तो सब अपना फ़ोन ही यूज़ कर रहे है।

पर अब सवाल ये आता है की हम इन Apps को छोड़ क्यों नहीं पाते सोशल मीडिया Application में दुनिया के Best Behavior Phycology काम करते है, जो जानते ही की किसी भी Application को Addictive कैसे बनाया जा सकता है इसमें बहुत सी ट्रिक्स यूज़ होती है लेकिन सबसे Important Human Behavior ट्रिक जो यूज़ होती है वो है Significance यानि Importance.

आईये इसे Simple शब्दों में समझते है।

हर एक इंसान को इम्पोर्टेंस की फीलिंग चाहिए ये फीलिंग हम लोगो के लिए उतनी ही जरुरी है जितना की Food आपको पता है की Maximum लोगो का कोई एक Particular Subject क्यों Favorite बन जाता है। क्या वह इसीलिए था की हमारा दिमाग उसी के लिए बना था बिलकुल भी नहीं।

ये सिर्फ इसीलिए है की हम बचपन में इस Subject में इम्पोर्टेंस मिली थी, हो सकता ही की हमने किसी Subject में 5 से 10 hours दे दिय हो और हमारे Parents या हमारे Teachers ने बोला Wao यार ये तो Math’s में तेज़ है और हम खुश हो गए फिर हमने मैथ्स में 40 से 100 घंटे और दे दिए।

अब बाकि Classmates से हम ज्यादा टाइम दे चुके है मैथ्स में इसीलिए हमारे टीचर ने हमारी तारीफ करना स्टार्ट कर दिया और हमको Constantly Particular Subject में Important मिलने लग गयी और सबने कहा की ये तो Naturally टैलेंटेड है।

वैसे ही सबको Importance चाहिए किसी ना किसी तरीके से। कोई अच्छे कपडे पहन के स्टाइल दिखाके Importance लेना चाहता है, कोई IAS का एग्जाम क्लियर कर के Importance लेना चाहता है, कोई लोगो की सेवा करके सबके नज़रो में अच्छा बनकर Importance लेना चाहता है और ये सच्चाई है।

इसलिए सोशल मीडिया साइट्स हमें सबसे आसान तरीका देना चाहती है Importance लेने का और वो है Like और Comments. आप सच बताईये की आप जितने भी फ्रेंड्स का पोस्ट Like किये थे उनमे से कितने लोगो की पोस्ट आपको एक्चुअल में अच्छी लगी थी।

Obviously हम में से Maximum का Answer होगा बहुत ही कम। तो सवाल ये है की हम खुद ऐसा क्यों सोचते है जब कोई हमारा पोस्ट Like करता है की वो एक्चुअल में हमें Like करता है और ये सायद हमें और सोशल मीडिया Creator लोगो भी पता है लेकिन अब कुछ Like ले करके आसानी से जब कुछ Importance की फीलिंग मिल ही रही है तो हम कुछ बड़ा काम कर के Importance की Feeling क्यों ले।

Anyway अब सवाल आता है की इसका सलूशन क्या है ?

तो इसका एक ही Answer है Dopamine Detox या जिसे हम कहते है की Dopamine Fasting. तो Basically Dopamine एक Neurotransmitter है, एक Chemical है जो हमारे ब्रेन में रिलीज़ होता है जब भी हम कोई मज़े वाले Activity करते है।

अब आप कहोगे ये तो अच्छी बात है, नहीं… ये अच्छी बात नहीं है।

सोशल मीडिया से Dopamine लेने से प्रॉब्लम ये है की सोशल मीडिया हमारी ब्रेन को Dopamine Anticipation के लिए Trend कर रहा है यानि हमें Notification आएगी Someone Like Your Photograph. अब आप देखना चाहते हो की वो Someone कौन है अब दुबारा से उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चले जाओगे।

जब ये बार-बार रिपीट होगा तो हमारा ब्रेन Trend हो जायगा की Notification के आने पर हमें ख़ुशी तो मिलती ही थी Dopamine रिलीज़ तो होता ही था।

अब होगा ये की जब भी Notification की आवाज हमें सुनाई देगी तो Notification को खोलने से पहले ही हमारा ब्रेन Dopamine रिलीज़ कर देगा और ये सायद कोई रिवॉर्ड भी नहीं होगा और इस Movement में हमें एक पालतू जानवर की तरह Trend हो जायेंगे और इसे छोड़ना काफी मुश्किल हो जायेगा।

तो इससे बचने के लिए Dopamine Detox काफी लोग फॉलो करते है यह एक Simple Concept है जो कहता ही की हम कुछ Particular Time  के लिए किसी भी Fun Activity के लिए Involve नहीं होंगे, ना की फ़ोन, ना ही म्यूजिक और ना ही कोई हॉबी।

इसमें हम Obviously बोर फील करेंगे और आईडिया ये है की जब हम ये Dopamine Detox करेंगे तो हम Dopamine Threshold Value को कम कर पाएंगे और बोरिंग चीज़े भी हमें अच्छी लगने लगेंगी।

Obviously इसके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है लेकिन Maximum लोग ये सवाल पूछते है ये कितनी देर तक करना चाहिए। वैसे तो आप इसे व्रत या फास्टिंग Consider कर सकते है। Fun Activity और हफ्ते में एक दिन Dopamine Fasting कर सकते है पर ईमानदारी से जिन लोगो का काम Digitally ही चल रहा है उनके लिए एक दिन इन चीज़ो से ऑफ रहना थोड़ा Difficult है।

इसलिए हम 1-2 Hours भी इसे रोज़ प्रैक्टिस कर सकते है। दोस्तों, मैं Dopamine Detox को डीप वर्क की तरह कंसीडर करता हूँ यानि हम जब भी कोई High Intensity Task करने वाले है तो उस वक्त अपना इंटरनेट बंद कर दो 1 से 2 घंटे तक क्योकि 1से 2 Hours के बाद हमें वैसे भी ब्रेक चाहिए होती है तो उस वक्त हमें Notification या और कुछ देख सकते है।

Obviously किसी भी चीज़ को चेक करने के लिए हमें फीडबैक चाहिए की हम कितन टाइम फ़ोन में स्पेंड कर रहे है और फ़ोन में क्या-क्या कर रहे है ताकि हम अपने को इम्प्रूव कर सके तो उसके लिए बहुत सी Application Available है जैसे की :- Your Hour, Screen Time, My Phone Time और बहुत सारे जिसे यूज़ कर के हम फीडबैक ले सकते है।

अब कई लोगो को ये आईडिया अजीब सा लगेगा की फ़ोन से छुटकारा पाने के लिए Phones Application Use करना ये क्या आईडिया हुआ ?  लेकिन यह रियलिटी है अब हम खुद Physically Stop Watch लेकर उस टाइम को तो Meager नहीं कर सकते।

तो दोस्तों, हमने देखा की :-

1. On Average एक इंसान सोशल मीडिया में हर दिन 5 से 6 घंटे वेस्ट कर रहा है जिसका मतलब है की 10 साल में 19710 घंटे सिर्फ फ़ोन में वेस्ट कर रहे है यानि 821 दिन, यानि करीबन 2.3 Years और ये बहुत ही डराने वाला नंबर है क्योकि हम इतने टाइम में किसी भी चीज़ में Zero Level से किसी Particular Field में Best Of Best बन सकते है।

2. फिर हमने देखा की, Elon Musk मानते है की सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा Reason है Depression और Anxiety का जसमे इंस्टाग्राम एक ऐसा प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म में हम हमेशा अपने रियलिटी को दुसरो की जूठी लाइफ के साथ Compare करते है और दुखी होते रहते है जब की जो लोग खुद ये चीज़े पोस्ट कर रहे है उनमे से Maximum लोग खुद ही दुखी है।

3. फिर हमने देखा था की, हर एक बार जब Notifications आते है तो हमारा ब्रेन Dopamine रिलीज़ करता है और जब हम इसके लिए ट्रैन हो जाते है तो बस Notification की आवाज से ही हमारा ब्रेन Dopamine रिलीज़ कर देता है और हम उस जाल में फस जाते है।

इससे बचने का एक ही तरीका था जिसे हम Dopamine Detox या Dopamine Fasting भी कहते है।

4. तो Dopamine Detox में हमने देखा था की, कुछ टाइम के लिए हमें हर Fun Activity से दूर जाना है और खदु को बोर होने देना है ताकि हमारा ब्रेन बोरिंग Activity को भी Accept कर ले और हमेशा से Fun Activity का इन्तजार ना करे।

5. इसके लिए हमने देखा था की हम ऐसी एप्लीकेशन भी यूज़ कर सकते है जो हमें पुरे दिन में बताये की हमने कितना टाइम फ़ोन में स्पेंड किया और किस Particular Application को कितना टाइम दिया।

इससे हम खुद के बहानो को भी Observe कर सकते है की क्या हम  इंटरनेट पर सोशल मीडिया पर ज्यादा टाइम बिता रहे है या फिर Actual में कोई Lecture या Business Video देख रहे है और अपने गोल को Achieved कर रहे है।

दोस्तों, हम अगर Social Media के वजाय बुक्स पढ़े तो ज्यादा Better Ideas हमारा ब्रेन Produce करेगा क्योकि हम और लोगो के Experience से सीखेंगे और काफी सारे  Different Field के Ideas को Combine करके हमारा ब्रेन नई Ideas भी क्रिएट कर देगा।


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