Morning Motivational Speech In Hindi – दिन की शुरुआत कैसे करे।

दिन की शुरुआत कैसे करे?

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Morning Motivational Speech In Hindi - दिन की शुरुआत।

Din Ki Shuruat Kaise Kare – क्या आप जानते हो आपके ब्रह्माण्ड में कितने तारे है आपको जानकर यकीन नहीं होगा लेकिन जितने तारे ब्रह्माण्ड में है ना उतने रेत के कण पृथ्वी पर भी नहीं है। बिगबैंग से निकले इस Universe ने 13 सौ 80 करोड़ साल की यात्रा पूरी कर ली है। इस वक्त हमारे पृथ्वी पर मनुष्य की औसत आयु 79 Years है जो की इस ब्रह्माण्ड और आकार और समय यात्रा के सामने बहुत बहुत ही छोटी है।

जब हम दिन की शुरुआत करते है तो कही ना कही कल जो हमारे साथ हुआ था उसका मेन्टल इफ़ेक्ट आज के दिन पर जरूर होता है। कल का दिन बेकार हुआ था की अच्छा हुआ था इसके आधार पर हम सुबह-सुबह आज का दिन कैसा होगा पहले ही सोच लेते है।

लेकिन आपको याद रखना चाहिए की समय की सबसे बड़ी खूबसूरती क्या है जो एक बार चला गया तो वह सिर्फ यादो के रूप में हमारे दिमाग में रहता है।

अब आप में से कई लोग बोलेंगे की हम अपने बीते टाइम की वजह से आज के वक्त में ठीक से काम नहीं कर पा रहे है।

ये मेरे नजरिये में बिलकुल गलत है हम बीते हुए वक्त की वजह से नहीं बल्कि बीते हुए वक्त में हमने जो काम किये थे उसका परिणाम भोग रहे है और अगर आज का ये वक्त किसी बुरे काम में लगा दिया या इसका ठीक से इस्तेमाल नहीं किया तो आने वाले टाइम में यही आपके कर्म आपके सामने दीवार बनकर खड़े हो जायेंगे।

Albert Einstein ने अपने थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी में कहा था की समय भी एक चाल से नहीं चलता है। ब्रह्माण्ड में कुछ ऐसी जगह है जहा पर जाकर समय का भी कोई मीनिंग नहीं रहता, उसका भी अस्तित्व ख़त्म हो जाता है या उसकी चाल भी बदल जाती है जैसे की ब्लैक होल। जहा पर जाकर समय और प्रकाश का भी अंत हो जाता है।

Same थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी हमारे डेली लाइफ में भी अप्लाई होती है आपने नोटिस किया होगा जब हम दुखी होते है तो समय मानो रुक सा जाता है और जब हम खुश होते है तो समय मानो दौड़ने लगता है वक्त का पता ही नहीं चलता।

और इस तरह से आप अपने इमोशंस की वजह से अगर समय की चाल से छेड़-छाड़ करोगे तो Same ब्लैक होल वाला हाल आपका भी होगा क्योकि अपने दुखो को दिल से लगाओगे तो वहा से कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे और अगर बहुत ज्यादा खुश रहोगे तो यार कब तक रहोगे एक दिन उसका भी अंत होगा और फिर से दुःख सुरु होगा इस चक्कर से बहार निकलना है।

एक Emotionally, मेंटली, स्टेट होनी चाहिए जब आप दिन की शुरुआत कर रहे हो कल क्या हुआ था या कल क्या होगा ये थॉट्स दिमाग में आना नार्मल सी बात है लेकिन मेरा यकीन मानो आपका पास्ट या फ्यूचर आपका ना तो कुछ बिगाड़ सकता है और ना ही आपका कुछ बना सकता है।

अगर आपकी जिंदगी की सम्पूर्ण ताक़त किसी चीज़ में है ना तो वो है आपका प्रेजेंट वो प्रेजेंट जिसमे आप बैठकर अभी जो काम कर रहे हो, वो प्रेजेंट जिसमे आप हमेशा रहते हो, वो प्रेजेंट जिसमे आप आलश करते हो, रोते हो, गलत काम करते हो, वो प्रेजेंट जिसमे आप खुद में झाकने की वजाये इस बाहरी दुनिया की तरफ झाकते हो।

वापस चलते है अपनी ब्रम्हांड की तरफ क्योकि वही से अपनी उत्पत्ति हुयी थी। समय कब सुरु हुआ और समय कब अंत होगा। बिगबैंग से पहले समय का कोई एक्सिस्टेंस नहीं था और जब Universe Collapse हो जायेगा तब भी समय का कोई एक्सिस्टेंस नहीं होगा ठीक उसी प्रकार से जब हम पैदा नहीं हुए थे तब हमारा कोई टाइम एक्सिस्ट नहीं करता था और जब हम मर जायेगे तो उसके बाद भी हमारा टाइम एक्सिस्ट नहीं करेगा ऐसा हर इंसान के साथ होता है।

लगभग हर 100 साल में दुनिया की पूरी पापुलेशन नयी पापुलेशन के साथ में रेप्लस हो जाती है सबका टर्न आता है और चला जाता है और जिसको कुछ करना होता है ना वो हमेशा प्रेजेंट में रहकर ही करकर चला जाता है आज और इसी वक्त में ही कर के चला जाता है।

ये लाइफ illusion है या रियलिटी इसका तो पता नहीं लेकिन दोनों ही ऑप्शन में हमारे पास जीने का एक ही समय है वर्तमान। इसी वर्तमान में ताजमहल बनाया गया था, लाल किला बनाया गया था, महाभारत का युद्ध लड़ा गया था। इंसानियत के हर बड़े से बड़े काम इसी वर्तमान में हुए थे।

अगर अपने इतिहास को किसी यादगार लम्हे में बदलना चाहते हो ना तो प्रेजेंट में जीना सीखो आज के वक्त में सबसे जरुरी चीज़ यही है की हम अपने हर तरह से वर्तमान में दिन-प्रतिदिन, हप्ते दर हप्ते, महीने दर महीने, और साल दर साल अपना बेस्ट करने की कोशिश करे। ये जो आपको वक्त मिला है ना आपको उसमे दुनिया की बदल देने की ताकत है और आप तो इस दुनिया का एक छोटा सा हिस्सा हो।

ये पृथ्वी हमारे ग्लैक्सी के सामने और हमारी ग्लैक्सी इस Universe के सामने एक कण के बराबर है इसलिए अपने मन पर ज्यादा बोझ ना ले, चीज़े ऐसी ही चलती है। जब तक आप अपने आपको प्रेजेंट में फील नहीं करवाओगे तब तक आप अपना फ्यूचर नहीं बना पाओगे।

अगर कोई महान राजा जिस वक्त युद्ध लड़ रहा होता था और उस वक्त अगर वह उस युद्ध को छोड़कर ये सपना देखता की यार मैं जित जाऊंगा तो हो सकता वो वही पर ही युद्ध में मारा जाये क्योकि उसका ध्यान उस समय के युद्ध में ना होकर फ्यूचर पे होगा।

इस जिंदगी को भी अपनी बुरी आदतों से बुरी एक्सपीरियंस से अपनी चुनौतियों से एक युद्ध मान कर चलो और इस युद्ध में आपका एक छोटा सा और एक बड़ा ही प्यारा सा हथियार है स्माइल मुस्कराहट हर चीज़ को हर लम्हे को गले को लगा कर स्माइल करते हुए लाइफ में आगे बढ़ते जाओ अपनी प्रेजेंट में ध्यान देते जाओ।

तो उठो आज और इसी वक्त इस वक्त की कीमत पहचाने आज इसी वक्त कुछ ऐसा करे की उससे हमारे फ्यूचर की आधार सिला अपने आप रखी जाये। अब पास्ट और फ्यूचर में बाऊंस करने की आव्यशकता नहीं है जरुरत है सिर्फ वर्तमान में मेहनत करने की।

।। जय हिन्द वन्दे मातरम।।


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