5 Secret Of Success From Hanuman Ji – हनुमान जी से सीखें।

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5 Secret Of Success From Hanuman Ji In Hindi

5 Secret Of Success From Hanuman Ji - हनुमान जी से सीखें।

हर इंसान अपने जीवन में बहुत सारी गलती करता है जब भी उसका सिखने का वक्त आता है तो वह एक दायरा बना लेता है और फिर उसी दायरे में रहकर सीखता है और इसीलिए वह कम अक्ल का रह जाता है।

आपके साथ कभी ना कभी ऐसा जरूर हुआ होगा आप भी कभी ना कभी ऐसा जरूर सोचते होंगे की ये तो मुझसे छोटा है ये मुझे क्या सिखाएगा, इसका तो धर्म अलग है इससे मैं क्या सीखूंगा या फिर आप कभी कभी ये भी सोचते है इसकी औकात ही क्या है मुझे सिखाने की और इसीलिए आप में अक्ल की कमी हो जाती है।

तो आज हम बात करने वाले है हनुमान जी के 5 ऐसे गुणों के बारे में जो हर इंसान के अंदर जरूर होना चाहिए। तो ध्यान से इन गुणों को पढ़िए और सिखने की कोशिश करिये।

1. जीवन में बड़े लक्ष्य बनाये और उन्हें हांसिल करे।

पहली जो सबसे बड़ी सिख हमे हनुमान जी के ज़िंदगी से मिलती है वो ये है की बड़े लक्ष्य बनाओ और उसे हांसिल कर के दिखाओ। आप सभी याद कीजिये की जब आप सब छोटे थे और कोई भी व्यक्ति आप से प्रश्न पूछता था की आपको अपने जीवन में क्या बनना है तो आप उसे कहते थे की मुझे पॉयलेट बनना है, इंजीनियर बनना है, डॉक्टर बनना है, या फिर कलेक्टर बनना है लेकिन अब अपने आप से प्रश्न कीजिये की क्या आप आज वो है जो आप बनना चाहते थे.. बिलकुल नहीं है।

हनुमान जी के जीवन से हम ये सिख सकते है की जीवन में हमेशा बड़ा लक्ष्य बनाओ और उस लक्ष्य को हांसिल कर के भी दिखाओ। हनुमान जी जब छोटे थे तो उन्हें दूर पर एक चमकती हुयी चीज़ नज़र आयी जो की सूरज था और हनुमान जी को लगा ये कोई फल है और वो उसे खाने के लिए दौड़ पड़े इंद्र जी ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं रुके और उसे अपने मुँह में ले लिए।

इसका मतलब हनुमान जी जब छोटे थे तो भी वो बड़ा लक्ष्य बनाते थे और उसे हांसिल कर के दिखते थे। जब सीता जी को सब लोग ढूढ़ने के लिए आगे बढ़ रहे थे तो सामने एक बहुत बड़ा समुद्र आ गया उनके साथ के बहुत सारे लोग हार मान गए, बहुत सारे लोग तो ये भी कहने लगे की अब हमे सीता जी नहीं मिलेंगी हमे वापस चल देना चाहिए लेकिन उस समय भी हनुमान जी ने हार नहीं मानी उन्होंने उस समुद्र को भी पार किया और सीता जी को ढूंढ निकाला।

जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए थे तब भी यही हुआ था वैध ने कहा था की संजीवनी बूटी से ही लक्ष्मण जी ठीक हो सकते है लेकिन साथ ही साथ ये भी कहा था की संजीवनी बूटी मिल पाना असंभव है क्योंकि वह हिमालय पर है और सिर्फ एक रात में उस जड़ीबूटी को लाना असंभव है।

उस वक्त सिर्फ हनुमान जी ही थे जिसने असंभव दिखने वाले काम को संभव कर के दिखाया था जब वह हिमालय पहुंचे तो उन्हें जड़ी बूटी नहीं मिल रही थी और इसलिए उन्होंने पूरा का पूरा हिमालय पर्वत वैध के सामने लाकर के रख दिया था इसलिए सिख को अपने जीवन में उतार लो हमेशा बड़ा लक्ष्य बनाओ और उस लक्ष्य को हांसिल कर के दिखाओ।

2. संवाद की कला को बेहतर बनाये।

दूसरी चीज़ जो हमे हनुमान जी से सिखने को मिलती है वो है संवाद की कला। इसका मतलब किसी भी इंसान से बात चीज़ कैसे करना है लेकिन अब आप कहेंगे की इसमें सिखने की जरुरत क्या है ये तो हमे पहले से आता है लेकिन सिर्फ बात करने को संवाद करना नहीं कहते संवाद करने का मतलब होता है की किस इंसान से हमे कैसे बात करना चाहिए ये भी पता होना बहुत जरुरी है।

जब हनुमान जी पहली बार लंका पहुंचे तो उनकी सबसे पहली मुलाकात विभीषण जी से हुयी थी विभीषण राक्षश जाती के थे लेकिन उसके बाद भी हनुमान जी ने उनसे सहजता से बात की क्योंकि उन्हें पता था की वभीषण राम भक्त है और वो बहुत ही अच्छे इंसान है।

बाद में जब हनुमान जी सीता जी के पास पहुंचे जो उन्होंने बताया की श्रीराम जी ने उन्हें ढूढ़ने के लिए भेजा है लेकिन सीता जी ने उनकी बात पर विस्वाश नहीं किया उन पर सक किया उन्हें बुरा-भला कहा और कहा की ये राक्षसों की कोई चाल है और इस बात से भी हनुमान जी को गुस्सा नहीं आया परेशान नहीं हुए।

उन्होंने बहुत ही विनम्रता के साथ सीता जी से बात की उन्हें अपना परिचय दिया और जो सक सीता जी को था उस सक को दूर करने के लिए श्रीराम के द्वारा दी गयी अंगूठी को सीता जी को दिया यहाँ पर संवाद का बहुत ही बड़ा रोल है।

लेकिन जब हनुमान जी रावण से मिलने पहुंचे तो वहा पर कुछ और ही संवाद था वहा पर हनुमान जी ने उन्हें अपने शक्तियो का परिचय दिया जो रावण हनुमान जी को सिर्फ एक वानर समझ रहा था। हनुमान जी ने बता दिया की उनके अंदर कितनी शक्ति है। इसलिए आपको भी अपने जीवन में पता होना चाहिए की आपको कब, कैसे, और किस प्रकार से बात करना है।

3. नीरअहंकारी बने।

तीसरा जो हनुमान जी का सबसे बड़ा गुण है जो हर इंसान के अंदर होना चाहिए वो है नीर अहंकारी बने इसका मतलब आपके अंदर अहंकार नहीं होना चाहिए आज यदि जीवन में थोड़ा सा भी कुछ पा लेते है तो हमारे अंदर अहंकार आ जाता है।

हम दुसरो को अपने से छोटा समझने लगते है हनुमान जी यदि चाहते तो वो रावण को खुद ही मार सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया उन्होंने पूरी लंका को जला दिया लेकिन रावण को नहीं मारा क्योंकि वो श्रीराम का आज्ञा का पालन कर रहे थे।

एक और घटना है जिससे हनुमान जी से नीरअहंकारी होने का हमे पता चलता है जब हनुमान जी लव और कुश से लड़ने के लिए गए थे तब उन्हें पता चल गया की ये दोनों श्रीराम के संतान है इसलिए उन्होंने उनसे युद्ध नहीं किया और खुद को लव और कुश के हांथो बंदी बनवा लिया।

इसलिए आप जीवन में कितने भी बड़े हो जाये आप के पास कितनी भी ताक़त आ जाये आपको पता होना चाहिए की उस ताक़त का इस्तेमाल आपको कब करना है और कब नहीं करना है आपको जीवन में कभी भी अहंकारी नहीं होना है।

4. स्वभाव में ह्यूमर रखे।

हनुमान जी की जीवन की चौथी सबसे बड़ी सिख है की हर इंसान के अंदर ह्यूमर का होना बहुत जरुरी है। हनुमान जी हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते थे जिससे माहौल खुशनुमा बना रहे लेकिन आप सोच कर देखिये आप के आस-पास में जो लोग रहते है वो हमेशा कोशिश करते है की माहौल को कैसे खराब किया जा सके और वो पूरी कोशिश भी करते है लेकिन दुनिया के जितने भी महान लोग होते है उनके अंदर ये गुण अवश्य होता है।

5. लक्ष्य मिलने तक विश्राम ना करे।

हनुमान जी की पांचवी सबसे बड़ी सिख है की आपको जब तक लक्ष्य ना मिल जाये तब तक आप विश्राम ना करे हनुमान जी जब समुद्र को पार करने के लिए आगे बढ़ रहे थे तो मैनाक पर्वत ने उनसे निवेदन किया की आप थोड़ी देर यहाँ पर आराम कर ले लेकिन हनुमान जी ने मना कर दिया और कहा की जब तक मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता तब तक मैं आराम नहीं करूंगा।

हमे भी अपने जीवन में इस सिख को जरूर सीखना चाहिए की जब तक हमारा लक्ष्य प्राप्त ना हो जाये तब तक हमारे अंदर आलश्य और आराम की भावना नहीं आना चाहिए।

एक बार फिर से इन गुणों को ध्यान से देखे और उन्हें अपने जीवन में अपनाये।

1. हमेशा बड़ा लक्ष्य बनाये और हांसिल करे।
2. संवाद की कला को बेहतर बनाये।
3. नीरअहंकारी बने।
4. स्वभाव में ह्यूमर रखे।
5. लक्ष्य मिलने तक विश्राम ना करे।

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