श्रापित गाँव की कहानी।

श्रापित गाँव की कहानी – Horror Story In Hindi

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श्रापित गाँव की कहानी - Horror Story In Hindi

गोपी नगर का गांव बहुत अमीर है यहाँ के लोग सिर्फ अपने काम से मतलब रखते है ऐसे ही लोगो को मतलबी कहा जाता है। यही गांव में पीपल का एक पेड़ है जो बहुत ही घना है जिसके निचे चबूतरा बना हुआ है।

सब लोग हसी ख़ुशी से रहते थे लेकिन एक दिन भिखारन बुढ़िया भीख मांगते हुए गोपी नगर गांव पहुंच जाती है वह मोहन के दरवाजे पर जाती है और भीख मांगती है।

बुढ़िया – बेटा कुछ खाना दे दो भूख लगी है भगवान आपको और धन देंगे।

मोहन – सुबह-सुबह भीख कौन मांगता है काम पर जाने के समय.. जाओ आगे अभी मैं काम पर जा रहा हूँ।

बाहर की आवाज सुनकर अंदर से कमला बाहर आयी।

कमला – रुको मैं इनके लिए कुछ खाना लायी हूँ।

बुढ़िया – भगवान तुम्हारा भला करे।

बुढ़िया खाना लेकर चली जाती है।

मोहन – क्या जरुरत थी खाना देने की पैसे की बर्बादी करती हो लोग सब हमसे अमीर हो रहे है और तुम पैसे उड़ा रही हो।

कमला – तुम बिना मतलब के बात मत करो खाना ख़राब हो चूका था इसलिए दे दिया।

खाना लेकर भिखारन बुढ़िया पीपल के पेड़ के निचे चली जाती है खाने को खोलती है तो उसमे से बदबू आती है गौर से देखा तो उसमे कीड़े पड़ चुके थे। गरीब बुढ़िया ने खाना फेंक दिया और दूसरे घर में भीख मांगने चली गयी और वह शिला नाम के औरत से बोली।

बुढ़िया – भगवान भला करेंगे तुम्हारा मुझे कुछ खाना दो और हां गन्दा खाना मत देना मैं पहले से ही बीमार हूँ और बीमार हो जाउंगी।

शिला – हां हां भीख मांगती हो और ऊपर से फरमाईश जाओ नहीं है मेरे पास देने के लिए कुछ।

गरीब बुढ़िया वहा से दूसरे घर में खाना मांगने चली गयी एक आदमी ने थोड़ा सा खाना दिया।

बुढ़िया – बेटा थोड़ा सा खाना और दे दो इसमें तो पेट भी नहीं भरेगा।

लड़का – देखो हम इससे ज्यादा नहीं दे सकते महंगाई का जवाना है पेट्रोल कितना महंगा हो गया है पता है।

गरीब बुढ़िया को गांव के लोगो को इतनी कम भीख मिली की उससे उसका पेट नहीं भरता कुछ दिन में वह और ज्यादा कमजोर हो गयी। बहुत अधिक गर्मी होने के कारण एक दिन बुढ़िया को बहुत जोरो से प्यास लगती है आस-पास पानी ना मिलने के कारण वो लोगो के घर जाकर पानी मांगने लगती है लेकिन वहा के लोग इतने मतलबी है की गरीब बुढ़िया को पानी भी नहीं दे रहे है।

बुढ़िया – पानी दे दो कोई मुझे पानी देदो।

उसे कोई भी पानी नहीं देता है उसे देखते ही वहा के लोग उसे भगा देते थे। लोगो के घर जाकर वह बहुत थक चुकी थी लेकिन उसे एक बूँद पानी पिने के लिए नसीब नहीं हुआ।

चलते-चलते वह उस पीपल के पेड़ के निचे जाकर बैठ जाती है कुछ देर बाद बीमारी और पानी ना मिलने के कारण बुढ़िया की वही पर मृत्यु हो जाती है। बुढ़िया के मृत्यु हो जाने के बाद वहा अजीब-अजीब सी घटनाये होने लगती है।

जब रात को सब लोग सो रहे होते है तो आधी रात को एक औरत के रोने की आवाज सुनाई देती है। ये आवाज इतनी तेज़ होती है की पुरे गांव को सुनाई देती है। रोने की आवाज के साथ-साथ चीखने-चिल्लाने की आवाज भी आने लगती है जिससे लोग और भी ज्यादा डरने लगते है।

गांव के लोग ने एक मीटिंग बुलाई सब लोग उसी पीपल के पेड़ के नीच इक्कठे होते है। उसमे से एक आदमी बोलता है “गांव वालो ये क्या हो रहा है गांव में रोज़ रात को एक औरत की रोने चिल्लाने की आवाज सुनाई देती है”

तभी एक औरत बोलती है “इसका क्या उपाय है मेरे बच्चे बहुत डर रहे है” तभी एक दूसरा आदमी बोलता है “सभी लोग रात को अपने अपने घरो में हनुमान चालीसा बजाओ” इसके बाद आवाज आनी बंद हो गयी।

लेकिन एक दिन मोहन उस पीपल के पेड़ के निचे से जा रहा था की उसकी कार खराब हो गई। पीपल के पेड़ के निचे से जो गुजरता था तो उसकी तबियत खराब हो जाती थी और उसे तेज़ बुखार हो जाता था।

तो कभी हसने की आवाज तो कभी रोने की आवाज तो कभी किसी की बात करने की आवाज आती है ये सारी बातें लोगो के डर को अंदर से और ज्यादा बढाती जा रही थी।

एक दिन अचानक गांव में पीपल के पेड़ के पास में रहने वाला एक व्यक्ति कुछ दिनों से लापता हो जाता है। सुबह उस व्यक्ति का मृत्यु शरीर पीपल के पेड़ के निचे पड़ा हुआ मिलता है। इस बात ने गांव वालो को और भी ज्यादा डरा दिया था।

कमला – कोई भी शाम होने के बाद घर के बाहर नहीं निकलेगा। गांव के सब लोग अपने घर के दरवाजे को बंद रखते है ताकि कोई गायब ना हो जाये।

मोहन – और उस पीपल के निचे तो भूल कर भी ना जाना भूत रहता है उस पर कुछ भी हो सकता है।

तभी कमला और मोहन के बच्चे बोलते है “ठीक है हम लोग कही नहीं जायेंगे” बच्चे चादर ओढ़ कर सो जाते है पुरे गांव के लोग बहुत डरे हुए है कोई भी घर के बाहर नहीं निकलता है। पुरे गांव में मानो मातम पसरा हुआ है।

मोहन और गांव के कुछ का एक साधु के पास जाते है और उस साधु बाबा से पूछते है “हम लोग एक बुढ़िया को भीख नहीं देने के कारण परेशान है वो भूख और बीमारी से मर गयी”

बाबा – ये सब जो भी हो रहा है उसमे तुम सब गांव वालो की ही गलती है तुमने एक बीमार और गरीब बुढ़िया को अपने लालच और निर्दयता के चलते मार डाला। तुम लोग उसे दो-चार रोटी भी नहीं दे सके जिसके कारण उस गरीब बुढ़िया की जान चली गयी और वो अब अपना बदला ले रही है।

गांव वाले डर जाते है और साधु बाबा से पूछते है “क्या इसका कोई इलाज नहीं है बाबा जी”

बाबा – हवन, पूजा का इंतजाम करना होगा तब सायद कुछ हो सकता है।

तब सभी गांव वाले बोलते है की ठीक है हम सब तैयार है।

हवन पूजन सुरु हुआ, साधु के मंत्र उपचार से चुड़ैल प्रगट हुयी।

चुड़ैल – ये साधु तुम क्यों इस मामले में पड़ रहे हो तुम अपने रास्ते चले जाओ वरना तुम्हे भी मौत मिलेगी।

बाबा – देखो इंसान से गलती हो जाती है तुम बताओ तुम्हे क्या चाहिए तुम्हारे नाम का मंदिर बनवा देते है लोगो को परेशान करना छोड़ दो।

चुड़ैल – हस्ते हुए बोलती है “जिंदे पर तो कुत्ते से भी ज्यादा बुरा व्यहार किया और अब देवी-देवताओ की बराबरी दे रहे हो मैं उस लायक नहीं हूँ मैं चुड़ैल हूँ चुड़ैल”

बाबा – कुछ तो उपाय होगा जिससे की तुम गांव वालो को छोड़ दो।

चुड़ैल – एक उपाय है इन सब पापियों को गांव छोड़ना पड़ेगा वरना सब मारे जायेंगे और साधु तुम भी चले जाओ क्योकि गुनहगारों के साथ बेगुनाह भी मारे जाते है इस गांव को मेरा श्राप है की जो भी इस गांव में रहेगा वो मरेगा जैसे मैं मरी थी।

यह बोलकर चुड़ैल गायब जो जाती है और साधु गांव वालो से बोलता है “इसका कोई इलाज नहीं है जब तक वह अपना बदला नहीं ले लेती वह शांत नहीं होगी”

धीरे-धीरे लोग बीमार होने लगे और बीमारी बढ़ती जा रही थी जिसके कारण गोपी नगर वालो को उस गांव को मजबूरी में छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा।

लोगो के एक गलती के कारण अपना-अपना घर अपनी जमीन जायजाद सब छोड़कर जाना पड़ा यह गांव अब सुनसान पड़ा है यहाँ अब तो ना कोई आता है और ना ही कोई रहता है। इसीलिए हमें कभी भी घमंड और निर्दयता से हमें किसी का अनादर नहीं करना चाहिए।


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