Smartphone Addiction In Hindi – मोबाइल की लत कैसे छोड़े?

मोबाइल की लत कैसे छोड़े

Smart Phone Addiction In Hindi How To Stay Away From Mobile Phone And Best Solution For Smartphone Addiction In Hindi Here, You Can Read Latest Collection Short Motivational Speech In Hindi For Students Life Lessons Motivational Quotes Success Story And Tips

Smartphone Addiction In Hindi - मोबाइल की लत कैसे छोड़े ?

Smartphone Addiction In Hindi – एक 13 का लड़का अपने घर में सुसाइट कर लेता है और सुसाइट नोट में लिखता है की मम्मी आप रोना मत, ऑनलाइन गेम में 40 हज़ार डूब गए है मैं इस लिए ऐसा कर रहा हूँ।

एक और दूसरे शहर में 14 साल का लड़का है वो सिर्फ इस वजह से सुसाइट कर लेता है क्योंकि उसकी मम्मी उससे Smartphone छिन लेती है और उसे लेकर के ऑफिस में चली जाती है। बच्चे को मोबाइल गेम की लत लगी हुयी थी।

ऐसी बहुत सारी खबरे आती है जो खबर सुनने वाले के लिए कोई नयी बात नहीं है। लेकिन जिसके परिवार या उसके किसी फॅमिली मेंबर के साथ ऐसा हो रहा है उससे एक बार पूछ कर देखिये उसको कितना बुरा लगता है ज़िंदगी जीने का पूरा हौसला टूट जाता है।

हमारे देश में करीब 76 करोड़ लोग Smartphone यूजर है। जिसमे से देश में 38 करोड़ लोग 2022 में किसी ना किसी तरह का गेम जरूर खेलते है। ऐसे में मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ ये जाने की कोशिश करने से की आखिर Smartphone के यूज़ से हमारे बच्चो पर कितना बुरा असर पड़ रहा है और क्या इस समस्या का कोई सलूशन है या नहीं।

हर समस्या और समाधान की गहराई से जांच-पड़ताल करने के बाद में ये टॉपिक आपके लिए लाया हूँ इसीलिए इसे आपको बिना स्किप किये पूरा देखना चाहिए, हो सकता है आप खुद मोबाइल Addiction के शिकार हो रहे हो या हो सकता है की आपके फैमिली में ऐसा कोई है जो Smartphone Addiction का शिकार हो रहे है और आपके बच्चे भी हो सकते है और ये बात आपको पता भी नहीं होगा।

आज हम हर उस बिंदु को कवर करेंगे जिनकी हेल्प से हम ये जान सके की कही हम स्मार्टफोन के प्रभाव में तो नहीं फस गए।

कितने लोगों के फैमिली में इतने बच्चे है जो बिना कार्टून देखे खाना नहीं खाते। वो तब तक कोई बात नहीं मानते जब तक उनके हाथ में स्मार्टफोन ना दे दो। ये बच्चो की बात नहीं है बड़े भी कम नहीं है कही पर ट्रेवल करते है तो उनकी मुंडी निचे ही रहती है।

पास पड़ोस में कौन है, देश दुनिया में क्या चल रहा है, प्रकृति में क्या चल रहा है, सर्दी-गर्मी बरसात क्या चल रहा है कोई मतलब नहीं है केवल अपने मोबाइल से मतलब है।

WHO ने एक बच्चो को लेकर एक गाइड लाइन जारी की थी जिसमे बताया गया था की उम्र के हिसाब से बच्चो को कितना टाइम मोबाइल स्क्रीन के सामने गुजारना चाहिए। वो बच्चो की गाइड लाइन थी हम बड़े क्या कर रहे है हम बच्चो के सामने ऐसा क्यों Example पेस कर रहे है।

क्या हमारे सपने इतने हलके है की छोटी सी 4 से 6 इंच की जो स्क्रीन है उसके अंदर ही सिमटकर हम रह गए। यह एक ऐसी लत है ना.. जो बहुत सारे लोगों को चपेट में ले रही है जिसका डायरेक्ट असर हमारे दिमाग पर पड़ता है।

छोटे बच्चो को आप डरा-धमका कर के मोबाइल से दूर कर सकते हो लेकिन असली प्रॉब्लम तब आती है जब इंसान समझदार हो और उसके बाद भी वह स्मार्टफोन के एडिक्शन में है।

एक रिपोर्ट में आया था की 50 % से ज्यादा Teen Agers मोबाइलफ़ोन एडिक्टेड है रिपोर्ट में ये भी बताया गया की 48 % टिन एजर्स लोग ऐसे है जो नोटिफिकेशन को लेकर एडिक्टेड है सोशल मीडिया पर कोई भी Notification आता है तो उसको चेक करेंगे।

करीब 78 % लोग ऐसे है जो हर घंटे अपने डिवाइस को बिना मतलब के चेक करते है ये जो चीज़ है ना वो नसे से भी खतरनाक है मैं यहाँ पर नसे को अच्छा नहीं बता रहा हूँ नशा कोई भी हो बुरा है।

मानता हूँ की आज के टाइम में स्मार्टफोन जरुरी है पढ़ाई उसी में होती है, ऑनलाइन क्लासेज उसी में लगती है, नॉलेज उसी से बढ़ता है, साथ में हमारी सिक्योरिटी भी बढ़ती है, कोई भी बच्चा कही भी जा रहा है एग्जाम देने जा रहा है कही पर भी जा रहा है तो मोबाइल जरुरी होता है बात करना जरुरी होता है लेकिन वो जरूरत कही जहर तो नहीं बन रही है।

कितनी फैमिली में ऐसा होता है की स्मार्टफोन को लेकर के लड़ाई होती है की सारा दिन मोबाइल को ले करके बैठा रहता है कुछ काम नहीं करता। जहा पर फ़ोन नहीं चलाना चाहिए, जहा पर Situation बोल रही है की यार तुम्हे कुछ और काम करने की जरूरत है वहाँ पर फ़ोन यूज़ किये जा रहे हो। जैसे – सोते टाइम अपने नींद से Compromise कर लोगे मोबाइल से कोम्प्रोमाईज़ नहीं करोगे।

भले ही कितने चीड़चिड़े हो जाओ कितने Deprecation आ जाये कितने बेचैनी आ जाये मोबाइल नहीं छूटने वाला। हो क्या रहा है यार ?

कोई काम कर रहे हो कही कुछ सिख रहे हो, आपके बिज़नेस को सपोर्ट मिल रहा है, मोबाइल से आपके लाइफ में कुछ इम्पॉरवमेन्ट काम हो रहा है, कुछ Quality ऐड हो रही है, तो समझ में आता है ये क्या गेम खेले जा रहे हो यार।

ये क्या मतलब सोशल मीडिया पर फोटो पर फोटो डाले जा रहे हो। अगर 10-15 Like कम मिल जायेंगे तो लाइफ में क्या हो जायेगा कुछ घाटा हो जायेगा क्या? अधिकतर जो टिन एजर्स और जो Young People है ना वो अपने स्मार्टफोन का यूज़ या तो गेम खेलने के लिए लेते है या फिर फालतू-फालतू का वीडियो देखते रहेंगे, टाइम पास करते रहेंगे, चैटिंग करते रहेंगे।

हमें सबसे पहले ये समझना है की आखिर किसी भी वीडियो को इतना एडिक्टिव क्यों बनाया जाता है क्योंकि जो गेम और वीडियो बना रहा है, उनको बिज़नेस करना है।

सुरु-सुरु में हम गेम क्यों खेलते है, वीडियो क्यों देखते है। थोड़ा सा अच्छा लगता है, मोबाइल में आराम से टाइम पास हो रहा है, मज़ा आ रहा है लेकिन जब असल में वो चीज़ हमारे शरीर में घुल जाती है ना तो हमारे ब्रेन में Dopamine रिलीज़ होता है यह एक हॉर्मोन होता है जो तब रिलीज़ होता है जब हमें किसी काम को करने में मज़ा आता है और फिर किसी और काम करने में Dopamine रिलीज़ नहीं होगा।

गेम को ऐसा बनाया जाता है ना.. की उसे अलग-अलग लेवल पार करने पड़ते है उससे हमें एक आर्टिफिसियल सटिफेक्शन मिलता है की हां यार मैंने इतने लेवल पार कर लिए है।

बचपन में जो गेम खेलते थे भागना, दौड़ना, क्रिकेट खेलना वो सब कहा गया। जो स्मार्टफोन के अंदर आपके गोल्स है वो आपके रियल लाइफ में क्यों नहीं है। गेम्स के अंदर क्या होता है, Smartphone के गेम में जब भी आप कोई लेवल पार करते हो तो आपको रिवॉर्ड्स मिलते है पॉइंट्स मिलते है, कही कुछ और मिलता है ताकि जो अगला लेवल है उसे ठीक से पार कर पाओ।

उसे पार करने में आपको बहुत मज़ा आ रह है। क्या आप रियल लाइफ में रिवॉर्ड्स नहीं दे सकते। अगर आपका होमवर्क पूरा हो गया तो खुद को रिवॉर्ड दो, थोड़ा बाहर घूम कर आओ। अगर आप पढ़ाई कर रहे हो या कोई अच्छा काम कर रहे हो तो जो बिच के 10-12 मिनट का ब्रेक ले रहे हो उसमे स्मार्टफोन मत छेड़ो यार बाहर जाओ किसी खुली हवा का आनंद लो कुछ और भी कर सकते हो।

कुछ बच्चो के पास में बहुत बड़े लक्ष्य होते है लेकिन वो लक्ष्य के कितने करीब है ये मेजर नहीं कर पाते लेकिन जब आप मोबाइल में गेम खेलते हो तब आपको पता रहता है की मुझे 70 पॉइंट्स मिल गए मुझे 30 पॉइंट्स और चाहिए, मैं इतना दूर आ गया हूँ इतना दूर और जाना है और उसके बाद मेरा लेवल कम्पलीट हो जायेगा, इसलिए वो अच्छा लगने लगता है।

रियल लाइफ में ऐसा नहीं होता आपको बताना पड़ता है की मंज़िल कितनी दूर है, हो सकता है की आप एक साल में अपनी मंज़िल प्राप्त कर लो या हो सकता है की आपको दस साल लग जाये यह एक सबसे बड़ा रीज़न हो सकता है यहाँ पर इसलिए आपके जो रियल लाइफ के गोल्स है उसमे आपके कोई डोपामाइन नहीं निकल रहा है।

लेकिन एक बार आप सोच कर देखिये की जब आप इस दुनिया से चले जाओगे तो आपको लोग किस लिए याद करेंगे। क्या आपको इस लिए याद करेंगे की भैया उस गेम में 20 लेवल तक पार कर लिए थे। आपको इस लिए याद किया जायेगा की आपने रियल लाइफ में क्या-क्या किया है।

अगला सलूशन है की बच्चो को उनके प्रोग्रेस के बारे में बताये उनको Motivate करे की वो सेल्फ मोटीवेट रहे। भाई ये ज़िंदगी है तुम्हारी जो वीडियो बना रहा है, जो गेम बना रहा है उसका काम है पैसा कमाना। अच्छी चीज़े देखो, अच्छी वीडियो देखो जो आपके लाइफ में कुछ Quality Add कर रही हो ऐसा काम करो जिससे आप अपने लाइफ में आगे बढ़ पाए।

ये जो स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत है ना अगर आप उसमे कोई Productive काम नहीं कर रहे हो तो वो आपको नुक्सान ही कर रही है। मुझे उम्मीद है की आपको स्पीच का मीनिंग समझ में आ गया होगा।


Read Also :-

Share With Your Friends