मौत के कुए का भूत की कहानी।

मौत के कुए का भूत की कहानी

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मौत के कुए का भूत की कहानी - Well Of Death Story In Hindi

यह कहानी है अमरपुर की हर साल की तरह इस बार भी इस गांव में बड़ा मेला लगा था। अगले दिन बाद मेले की शुरुआत होने वाली थी। हर बार की तरह नए-नए झूले, खिलौने, मिठाई वाला, चाट गोलगप्पे वाले भी अपनी दुकान सजाये बैठे थे लेकिन इस बार भी गांव के लोगो का ध्यान मौत के कुए वाले खेल पर लगा हुआ था।

इस खेल के प्रचार वालो ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी थी। मोहन एक रिक्शे पर माइक लिए घोषड़ा कर रहा था “आ गया.. आ गया एक बार फिर से आ गया जिस खेल ने जीता है सबका दिल वह फिर से आपके गांव आ गया, करोगे देर तो समस्या होगी विकट क्योकि बिक जायेंगे खेल के सारे टिकट”

गांव का हर एक आदमी जल्दी से जल्दी टिकट लेकर खेल का सबसे पहला शो देखना चाहता था। अगले दिन खेल का पहला शो था लेकिन उसी रात गांव में एक अजीबो-गरीब घटना घटी।

जहा पर मौत के कुए का खेल दिखाने की तैयारी थी आधी रात के बाद अचानक वहा से मोटर साइकिल चलाने की आवाज आने लगी एक घर में श्याम लाल, उसकी पत्नी देवकी और उसकी 6 साल की बेटी गूंजा सो रही थी अचानक से गूंजा की नींद खुल जाती है।

गूंजा – पापा.. पापा.. जागो ना देखो मौत के कुए का खेल सुरु हो गया है चलो ना देखने।

अपनी बेटी गूंजा की आवाज सुनकर दोनों जग जाते है।

देवकी – अरे क्या हो गया गूंजा इतनी रात को कहा जाने की बात कर रही हो।

गूंजा – माँ हमने उस मौत के कुए का टिकट लिया है ना देखो ना वो खेल सुरु हो गया है तुम्हे मोटर साइकिल की आवाज आ रही है ना।

श्यामलाल – बेटा अभी तो रात है वो खेल तो कल शाम को सुरु होगा।

गूंजा – पर ये आवाज कैसी है पापा।

श्यामलाल – अरे होगी कोई आवाज.. चलो सो जाओ।

गूंजा सो गयी लेकिन जैसे रात बीत रही थी मोटर साइकिल की आवाज बढ़ती जा रही थी कुछ देर बाद मोटर साइकिल की आवाज आनी बंद हो गयी और वहा से एक औरत और बच्चे के रोने की आवाज आने लगी।

उस आवाज से गूंजा और उसके माता-पिता की नींद खुल गयी इस बार वह आवाज उन दोनों ने भी सुनी। वह सब बहुत डर गए वह उस जगह पर जाना तो चाह रहे थे लेकिन उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी।

अगली सुबह जब उन लोगो ने गांव वालो से यह बात बताई तो उनकी बातो पर किसी ने ध्यान नहीं दिया क्योकि उनके सिवा वह आवाज किसी ने नहीं सुनी थी इसका सायद ये भी कारण रहा हो की गूंजा का घर मेले वाले मैदान के पास में था।

उसी शाम देवकी, श्यामलाल और गूंजा मेला देखने गए। चारो ओर लोगो की भीड़ थी कोई झूले पर बैठा चिल्ला रहा था, तो कोई नए खिलौने हाथ में लिए मुस्कुरा रहा था, कोई जलेबिया देखकर लार टपका रहा था, तो कोई गोलगप्पे के दुकान पर बिना गिने गोलगप्पे खा रहा था लेकिन गूंजा को तो इंतजार था मौत के कुए का खेल सुरु होने का वहा भी कई सारे लोगो की भीड़ थी।

लोगो खेल चालू करने के लिए कह ही रहे थे की मोटर साइकिल स्टार्ट करने की आवाज आयी। मोटर साइकिल का चालक एक्सेलरेटर पर एक्सेलरेटर बढ़ाये जा रहा था। बाइक की आवाज पुरे मेले में गुज रही थी।

दर्शक बाइक की आवाज से रोमांचिक हो रहे थे कई लोग तो सीटिया भी बजाने लगे थे लेकिन इस बिच लोगो ने देखा की मौत के कुए में एक छोटी सी बच्ची बैठी रो रही है लोगो ने आवाज लगायी की ये किसकी बच्ची है।

कोई उस बच्ची को निकालता उसके पहले ही लोगो ने देखा कुए के अंदर अचानक एक औरत भी आ गयी उसका चेहरा बड़ा डरावना लग रहा था। वह बच्ची उसके गोद में जाकर बैठ गयी लोगो ने देखा की जब वो रहे है तो उनके आँखो से आंसू नहीं बल्कि खून निकल रहे है।

कुछ ही देर में वो दोनों उड़ते हुए बाहर आ गए जिसने भी यह देखा वह बस एक ही आवाज में चिल्लाया “भूत भूत” सभी लोग बाहर निकल आये।

मौत के कुए के मालिक तक ये बात उसके कर्मचारियों द्वारा पहुंची उसे बहुत गुस्सा आया और बोला “ये क्या बकवास है और तुम लोगो ने ये क्या भूत भूत लगा रखा है, पुरे मेले में चहल-पहल है और यहाँ भूत की रट लगा रखी है, लगता है तुम लोगो का काम करने का मन नहीं है बस मुफ्त की पैसे चाहिए तुम्हे, चलो अगले शो की तैयारी करो”

लेकिन अगला शो भी बिलकुल खाली रहा क्योकि ये अफवा फ़ैल गयी थी की मौत के कुए में भूत है अब तो मालिक का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच गया और सारा गुस्सा अपने स्टाफ पर उतार दिया।

उसी रात जब मालिक गहरी नींद में था तभी उसे तेज़-तेज़ बाइक चलाने की आवाज आयी उस आवाज से उसकी नींद खुल गयी वो गुस्से में बड़बड़ाता हुआ गया। वहा पहुंचते ही वह जो देखा उसे अपने आँखो पर विस्वाश नहीं हुआ उसने देखा की मौत के कुए में एक आदमी लगातार बाइक चलाये जा रहा है वह आदमी अपना सिर निचे कर रखा है।

मालिक ने उसे बुलाया लेकिन मोटर साइकिल के चालक ने कोई जवाब नहीं दिया दूसरी ओर ये आवाज आस-पास के पुरे गांव वालो को सुनाई दे रही थी। सभी को आश्चर्य हो रहा था की आखिर इतनी रात को ये आवाज कैसी है।

सभी को डर भी लग रहा था फिर भी कुछ लोगो ने हिम्मत की और गांव के सरपंच जी के साथ में मेले में पहुंचे गूंजा भी श्यामलाल के साथ वहा पहुंची वहा उन लोगो ने भी वही दृश्य देखा जो मौत के कुए का मालिक देख रहा था।

वह आदमी अब भी लगातार बाइक चलाये जा रहा था तभी फिर से वही औरत और बच्ची अचानक से वहा आ गयी। सभी गांव वाले उस औरत और बच्ची को गौर से देख रहे थे। तभी जो आदमी बाइक चला रहा था उसके सिर से खून बहने लगा उसके खून से मौत के कुए की पूरी दीवार लाल हो गयी।

कुछ देर बाद वो औरत और बच्ची उसी तरह रोने लगे। अब तो सारे गांव वालो की हालत ख़राब हो गयी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये लोग है कौन तभी मौत के कुए का मालिक फिर से चिल्लाते हुए कहता है “अरे सुन नहीं रहे हो तुम कौन हो, तुम लोगो को क्यों डरा रहे हो क्यों तुम मेरे खेल को बदनाम कर रहे हो”

मालिक की बात सुनकर बाइक चलाने वाला अपना सिर ऊपर करता है उसे देखकर मालिक की आवाज लड़खड़ाने लगती है “तुम.. तुम कहा से आ गए विक्रम तुम तो…”

सरपंच – अरे कौन है ये तुम इसे जानते हो क्या।

तब बाइक चलाने वाला अपना बाइक रोकता है और कहता है की “क्यों मालिक आप बताओगे या मै बताऊ इन्हे”

मालिक – मै क्या बताऊ मुझे कुछ नहीं पता…

तब विक्रम ने बताना सुरु किया की…

विक्रम – गांव वालो यह एक दुष्ट आदमी है, इसके सीने में दिल नहीं है यह जानवर है जानवर। मेरा नाम विक्रम है मै पिछले साल तक इसके साथ काम करता था आप तो जानते है की मौत के कुए में गाड़ी चलाना हर दिन मौत से गले लगाना जैसा काम है। मै हर रोज़ अपने परिवार और इसके लिए जान की बाजी लगाकर मोटर साइकिल चलाता था पर उस दिन सायद मेरा दिन ख़राब था। किसी दूसरे गांव में मेला लगा था मै अपना खेल दिखा रहा था की अचानक मोटर साइकिल का एक्सीडेंट हो गया और मेरा सिर कुए के दीवार से जा टकराया लगातार खून बहता रहा और मै बेहोश हो गया और फिर मेरी मौत हो गयी।

विक्रम के मौत के बाद उसकी पत्नी और उसकी छोटी सी बेटी के सामने जीवन चलना बहुत कठिन हो गया वो एक दिन मालिक के पास गए और कुछ पैसे मांगे पर उसने कोई मदद नहीं की और वहा से भगा दिया।

वे दोनों परेशान होकर बाहर चले आये विक्रम की पत्नी ने किसी और जगह काम करने की कोशिश की लेकिन कही काम नहीं मिला। भूखे-प्यासे सड़क पर भटकते कई दिन बीत गए और फिर भूख से उन दोनों की भी मौत हो गयी।

विक्रम – गांव वालो आप लोग ही बताईये मेरा और मेरे परिवार का क्या दोष था जिसकी हमें सजा मिली। अरे हम तो कलाकार है इसी से हमारी रोजी चलती है लेकिन कल को कोई हादसा हो जाता है तो मालिक हमें मरने को छोड़ देता है हम पूरा जीवन आपके खुसी के लिए आपके मनोरंजन के लिए काम करते है और बदले में हमें क्या मिलता है।

विक्रम की बात सुनकर गांव वालो ने उस मालिक को मारने के लिए घेर लिया।

मालिक – अरे.. अरे मुझे छोड़ दो मुझसे गलती हो गयी।

सरपंच – हम तुम्हे एक ही सर्त पर छोड़ेंगे की तुम अपने यहाँ काम करने वालो की गारंटी लोगे की उन्हें कुछ हो गया तो उस परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ोगे। अरे आज कल तो बिमा होता है क्यों नहीं सबका बिमा करवा देते।

सरपंच की बात मालिक मान गया उसने सभी काम करने वालो का बिमा करवाया। विक्रम जीते जी अपने और अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाया लेकिन मरने के बाद अपने साथियो का भविष्य सुरक्षित कर दिया।


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